Paintings by Swapnil !!

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BEAUTIFUL AND SPELLBINDING ART WORK BY JEWELLERY DESIGNER & ARTIST ‘SWAPNIL SHUKLA’ ☆☆☆☆☆☆☆

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SWAPNIL SHUKLA is an Indian Jewellery Designer …Fashion Consultant …. Design Columnist …. Artist …Crafts expert and Author …. She is the chief Designer and co -owner of Swapnil saundarya Label , which is a luxury craft manufacturing firm .
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Glittering Updates ~ The Indian Jewellery Journal

SWAPNIL   SAUNDARYA  e-zine 
Presents

Glittering Updates ~ The Indian Jewellery Journal
Vol -04 , Year 2016 , Part – 3rd

Taarkasi | by Swapnil Shukla
कटक की उत्कृ्ष्ट विरासत :: ‘ तारकसी ‘

 

‘ कटक ‘ , उड़ीसा राज्य का प्रसिद्ध शहर , कई मायनों में भारत के ख्याति प्राप्त शहरों में से एक है. महानदी ब्रिज,चण्डी मंदिर, सड़क किनारे के स्वादिष्ट भोज्य पदार्थ जैसे दही बड़ा, आलू दम, गुपचुप और चाट , बाराबाती स्टेडियम व किला, दुर्गा पूजा, बलियात्रा या कार्तिक पूर्णिमा जैसे त्योहार की बात करें या पीतल, हाथी दाँत और चाँदी पर की गई उत्कृ्ष्ट दस्तकारी व कलाकारी या तलाश हो बेहतरीन कॉटन व सिल्क फैब्रिक की , कटक शहर को  कला, संस्कृ्ति व विरासत का शहर कहना अतिशयोक्ति न होगा . कटक की मशहूर व बेमिसाल विरासत सिल्वर फिलिग्री या तारकसी के काम के कारण कटक को सिल्वर सिटी भी कहा जाता है.

तारकसी की कला जो कि 500 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है, कला, सौंदर्य व उपयोगिता का महान मिश्रण है. यह कला आज के आधुनिक समय में भी प्रासंगिक है जो अपनी पारंपरिक जड़ों के साथ जुड़ी हुई है. पशु- पक्षी, फूल- पत्ती आदि डिज़ाइन्स से लैस मिनचर  हैण्ड्बैग्स , आभूषण , स्मारिका ( सूवनिअर ) व कोणार्क चक्र व ताज महल का रेप्लिका ( प्रतिकृ्ति ) आदि तारकसी द्वारा तैयार किए जाते हैं जो बेहद मनमोहक व आकर्षक लगते हैं. तारकसी द्वारा तैयार महाभारत को आधार बनाकर अर्जुन व भगवान्  कृ्ष्ण का रथ अधिक प्रचलित है.

तारकसी की डिज़ाइन्स को चाँदी के तारों व पन्नी द्वारा तैयार किया जाता है. चाँदी के तारों व पन्नी को कुशल कारीगर मनमाफ़िक डिज़ाइन्स के अनुरुप ढालते हैं. जिसके फलस्वरुप हमें बेहतरीन व अनंत सौंदर्य से लैस आभूषणों  व वस्तुओं की प्राप्ति होती हैं. ग्रैन्यूलेशन, स्नो ग्लेज़िंग व कास्टिंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर तारकसी की कला को नया आयाम दिया जाता है. प्लैटिनम पॉलिश द्वारा तारकसी से लैस आभूषण व वस्तु की चमक को बढ़ाया जाता है .तारकसी की कला को एक अलग रुप प्रदान करने के लिए कारीगर कभी- कभी चाँदी- पीतल को मिश्रित करके एक भेदकारी व अनमोल वस्तु को तैयार करते हैं.

सिल्वर फिलिग्री अर्थात तारकसी डिज़ाइन्स से लैस आभूषणों की सुंदरता व दमक बेमिसाल होती है. हाथों के आभूषण , हार, बिछिया और खासकर पायल , लोगों के बीच अधिक प्रचलन में हैं. तारकसी द्वारा तैयार पायल, जिसमें सेमी प्रीशियस स्टोन्स जड़े हों, की माँग सबसे अधिक है. सिंदूर दान, पेंडेंट , कानों की बालियाँ, हेयर पिन्स, ब्रूचेस भी अत्यधिक प्रचलित हैं.

ओड़िसी नृ्त्य के लिए भी नृ्त्यांगनाएं व नृ्तक अमूमन तारकसी कला से लैस आभूषण को ही अधिक तवज्जो देते हैं.  प्राचीन समय में ओड़िया संस्कृ्ति के अनुसार विवाह में तारकसी द्वारा तैयार सिंदूर दान का उपयोग अनिवार्य था . आज के आधुनिक समय में ओड़िया विवाह में तारकसी द्वारा तैयार वेस्ट बैण्ड ( कमर बंध ) व पायल और बिछिया का उपयोग अनिवार्य है.

इसके अतिरिक्त प्रति वर्ष कटक में दुर्गा पूजा में तारकसी कला का विभिन्न पाण्डालों में प्रयोग किया जाता है. माँ दुर्गा के आभूषण भी तारकसी द्वारा ही तैयार किए जाते हैं जो बेहद आकर्षक व भव्य होते हैं.

तारकसी की कला कटक ही नहीं अपितु भारत देश की सर्वाधिक अनमोल विरासतों में से एक है . तारकसी का कार्य कुशल  कारीगरों के अभाव में संभव नहीं . तारकसी की कला कुशल , योग्य कारीगरों की मेहनत, लगन व कड़े परिश्रम का साक्षात उदाहरण है जो सौंदर्य, उपयोगिता व लावण्य का मिश्रण है.

अत:  तारकसी की कला में पारंगत कारीगरों की उन्नति के लिए सरकार के साथ- साथ आम लोगों को भी प्रयास करने चाहिये ताकि दिनों- दिन सुविधाओं के अभाव में विलुप्त होती  इस कला को प्रोत्साहन मिले और इस बेमिसाल व अनमोल कला को देश – विदेश में ख्याति प्राप्त हो सके.

Bidri Work | by Swapnil Shukla

काले व सफेद का सौंदर्यवान संगम :: बिदरी वर्क 

 

काले व सफेद का संगम हमेशा से ही लोगों को लुभान्वित करता है. रंगों की महत्ता को यूँ तो दरकिनार नहीं किया जा सकता . फिर भी काले व सफेद के मिश्रण की भी अपनी ही अदा है  और इस मिश्रण का समावेश यदि आपके आभूषणों या सजावटी वस्तुओं में किया जाए , तो काले व सफेद का यह अतुल्नीय संगम निश्वित तौर पर अत्यंत मनमोहक व आकर्षक सिद्ध होगा. काले व सफेद का यही सौंदर्यवान संगम देखने को मिलता है बिदरी वर्क में .

कर्नाटक के बिदर की खूबसूरत व अदभुत दस्तकारी बिदरी वर्क 14वीं शताब्दी के दौरान विकसित हुई. बिदरी वर्क से तैयार वस्तुओं का क्रेज़ आज भी इसके जानकार लोगों के लिए आकर्षण का विषय है. बिदरी वर्क से लैस वस्तुएं , संपन्नता का प्रतीक मानी जाती हैं.

बिदरी शिल्प की उत्पत्ति को 14-15 वीं शताब्दी के दौरान बिदर में शासन करने वाले बहमनी सुलतानों की देन माना जाता है. इसकी उत्पत्ति पुरातन परसिया ( Persia ) में हुई. बाद मे इसे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के अनुसरणकर्ताओं द्वारा भारत लाया गया .धीरे-धीरे कुशल कारीगरों द्वारा इसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक सफलतापूर्वक व पूर्ण  दक्षता के साथ पहुँचाया गया जिसके फलस्वरुप इस अनमोल शिल्प कला का अस्तित्व आज भी जीवित है .

बिदरी वर्क से लैस आभूषण , बर्तन, सजावटी वस्तुएं आदि कास्टिंग ( Casting ) प्रक्रिया द्वारा ताँबे ( Copper ) और जस्ते ( Alloy ) के मिश्रण से तैयार की जाती हैं . जस्ते के मिश्रण द्वारा वस्तु को काला रंग प्रदान किया जाता है.

कास्टिंग प्रक्रिया के बाद कारीगर छेनी के माध्यम से वस्तु पर डिज़ाइन उकेरते हैं. फिर  शुद्ध चाँदी के तारों व पटटियों को खाँचों में जड़ा जाता है. इसके बाद एक विशेष प्रकार की मिट्टी द्वारा लेई बनाकर तैयार वस्तु की उस सतह पर लगाया जाता है जिसे काले रंग में ढालना हो. तेल के उपयोग द्वारा तैयार वस्तु को फिनिशिंग टच दिया जाता है.

बिदरी वर्क की डिज़ाइन्स के लिए साधारणतय:  अशर्फी की बूटी ( Asharfi-ki-booti ) , बेलें  (vine creepers), ज्यामितीय अभिकल्प ( geometric designs ), मानव आकृ्ति, ख़स ख़स के पौधे व फूल ( poppy plants with flowers ) आदि के मोटिफ्स का प्रयोग किया जाता है . इसके अतिरिक्त परसियन गुलाब ( Persian roses )  और अरबी में लिखे गए कुरान के उद्धरण के अभिकल्पों से लैस बिदरी वर्क की वस्तुओं की भी काफी माँग है.

प्रारंभिक समय में बिदरी शिल्प कला का प्रयोग हुक्का, पानदान , पुष्प पात्र ( गुलदान ) बनाने में होता था. पर वर्तमान समय में आभूषण , तश्तरी ( Tray ), निशानी ( keepsakes ), कटोरा ( Bowl ), अलंकृ्त संदूक ( ornament boxes ) , सजावटी वस्तुएं आदि बनाने में बिदरी वर्क का प्रयोग किया जाता है. औरंगाबाद में कारीगर अजन्ता की गुफाओं में बनी आकृ्तियों की डिज़ाइन्स को बिदरी शिल्प से लैस वस्तुओं में प्रयोग करते हैं जो विदेशी पर्यटकों के बीच अधिक लोकप्रिय हैं.

आधुनिक समय में विश्व प्रसिद्ध बिदरी वर्क पुनरुद्धार के मार्ग पर प्रशस्त है. भिन्न- भिन्न प्रकार के अभिकल्पों द्वारा तैयार बिदरी वर्क की वस्तुएं विभिन्न होम डेकोर व लाइफस्टाइल स्टोर्स की शान में इज़ाफा कर रही हैं. लोगों के बीच बिदरी वर्क की वस्तुओं व आभूषणों की खासी माँग , इस अनमोल विरासत के सुखद भविष्य का परिचायक है. कर्नाटक राज्य के विभिन्न शिल्प विकास संघों द्वारा बिदरी वर्क के कारीगरों के प्रोत्साहन व उन्नति के लिए अनेकों सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं.

कर्नाटक व आंध्र प्रदेश के अलावा बिदरी शिल्प की जड़ें बिहार, लखनऊ व मुर्शिदाबाद में भी फैली हुई हैं. अत: आप भी बिदरी वर्क द्वारा बनाए गए आभूषणों व अन्य नुमाइशी वस्तुओं को अपनी ज़िंदगी में स्थान दीजिये और काले व सफेद के संगम से बनी बिदरी शिल्प कला के सौंदर्य का लुत्फ उठाइये.


Jewels of Maharashtra | by Swapnil Shukla

ज्वेलस ऑफ महाराष्ट्र 

 

हमारे देश में हमें विभिन्न परंपराएं , संस्कृति, धर्म,  मान्यताएं आदि देखने को मिलती हैं. ये विभिन्नता ही हमारे देश को अन्य देशों से अलग बनाती है. और विभिन्नता में एकता का मंत्र हमारे देश के गौरव को बढ़ाता है. भारतीय शिल्प व विभिन्न कलाओं  में भी इसका असर देखने को मिलता है . देश के विभिन्न प्रदेशों की अपनी अपनी संस्कृति , पहनावा आदि है जो उन्हें दूसरे प्रदेशों से पृथक करता है और उनकी संस्कृति को दर्शाता है . संस्कृति की यह भिन्नता कहीं न कहीं उनकी पहचान भी बन जाती है . फ़ैशन जगत में भी इस विभिन्नता का जमकर उपयोग किया जाता है . किसी प्रदेश विशेष के पहनावे, आभूषणों के इतिहास को आज के परिवेश के साथ जोड़्कर फ़ैशन जगत में परिधानों व आभूषणों को नया आयाम दिया जाता है. यह सुखद व रचनात्मक क्रियाएं हमारे जीवनशैली व सौंदर्य में इज़ाफा करती हैं. इसी संदर्भ में आज हम नज़र डालेंगे  महाराष्ट्र प्रदेश के आभूषणों की विशेषताओं पर.

महाराष्ट्र के आभूषणों का अपना एक पृथक  अस्तित्व व पहचान है. देखने में अत्यधिक सौंदर्यपरक ये आभूषण किसी भी स्त्री के लालित्य में चार चाँद लगाने में पूर्ण रुप से सक्षम  हैं. मराठा पेशवा शासनकाल से प्रेरित महाराष्ट्र के आभूषणों की अपनी ही  एक अलग अदा है. इन आभूषणों का निर्माण अधिकतर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में होता है. इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रत्येक आभूषण के अभिकल्प के पीछे एक सोच है ,एक उद्देश्य है. बात चाहे कोल्हापुरी साज की हो या बेलपान वज्रटिक हार की, इनमें सम्मिलित प्रत्येक मोटिफ के इस्तेमाल की अपनी एक वजह होती है . बात चाहे स्वयं को नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाने की हो या देवी देवताओं पर अ‍टूट विश्वास  की हो,महाराष्ट्र  के आभूषणों को तैयार करने में इन बातों को ध्यान में रखा जाता है. प्रमुख रुप से जो महाराष्ट्रियन आभूषण महिलाओं के आकर्षण का केंद्र रहे हैं वे निम्नलिखित हैं

करवरी नथ, को मराठी महिलाओं का सबसे प्रियतम आभूषण माना जाता है.बसरा मोती से जड़ी , इन नथों के डिज़ाइन में माणिक और पन्ना जैसे बेशकीमती रत्नों को जोड़्कर ,इनकी खूबसूरती में इज़ाफा किया जाता है.

गुलसरी , पारंपरिक महाराष्ट्रियन  चोकर को कहते हैं जिसे शुद्ध सोने के तार से बनाया जाता है, प्रमुख आभूषणों की गिनती में आता है.

वज्रटिक, जवारी अनाज के आकार के बीड्स के संयोजन से बनता है और स्त्रियों के लालित्य में चार चाँद लगाता है.

बेलपान वज्रटिक हार , बिल्व पत्र की पवित्र पत्ती के आकार को ध्यान में रख कर डिज़ाइन किया जाता है . इसकी खूबसूरत डिज़ाइन के चलते ये मराठी महिलाओं के आकर्षण का केंद्र है .

मोहन माला , एक लंबा हार है जो सोने की मोतियों की कई लेयर्स व चेन स्ट्रिंग्स से बनता है और ये सूर्य के आकार के पेंडेंट से सुसज्जित होता है .

सूर्य हार, सूर्य की किरणों की डिज़ाइन से लैस होता है व महिलाओं के व्यक्तित्व में चार चाँद लगाता है.

कोल्हापुरी साज, महाराष्ट्रियन महिलाओं के लिए अत्यंत माहत्वपूर्ण है . मराठी महिलायें इसे मंगलसूत्र के  रुप में इस्तेमाल करती हैं.यह जव मणि व विभिन्न पत्तियों की डिज़ाइन से लैस होता है जिनमें खूबसूरत नक्काशी की जाती है जो इसके सौंदर्य को और अधिक बढ़ाता है. इसके आलावा कोल्हापुरी साज में एक छोटा पेंडेंट होता है जिसमें माणिक रत्न जड़ा होता है.
कोल्हापुरी साज में  विभिन्न पेंडेंट्स को सम्मिलित किया जाता है. इनमें 21 पेंडेंट्स भगवान विष्णु के दस अवतारों को दर्शाते हैं , 8 पेंडेंट्स अष्ट्मंगल ,02 पेंडेंट्स माणिक और पन्ना रत्न और आखिरी पेंडेंट् ताबीज का होता है जिसे डोरला कहते हैं . मान्यता है कि इसे घारण करने से घारणकर्ता  की नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा होती है. इसके मध्य में माणिक रत्न जड़ा जाता है . हार में मसा ( मछली) , कमल, करले,  चन्द्र ,  बेलपान , शंख , नाग, कसम और भुंगा, बाघनख , ताबीज , लाल और हरा पनाड़ी, कीर्ति मुख , एक दूसरे  के विपरीत स्थापित होते हैं.

चंपाकली हार , गजरे की भाँति दिखने वाला ये हार पुष्पों  की आकृति से प्रेरित होकर तैयार किया जाता है.

पुतली हार , पारंपरिक कोल्हापुरी माले को कहते हैं जिसमें लक्ष्मी अथवा राम सीता की आकृति को जटिल नक्काशी द्वारा उकेरा जाता है .

चंदन हार, तीन से चार सोने की चेन को मिलाकर चंदन हार तैयार किया जाता है.

कान बालियाँ, मोती से बनी अदभुत बालियों को कहते हैं .इनका महाराष्ट्रियन आभूषणों में विशेष स्थान है . कुड़्या बालियाँ मोतियों के गुच्छे की तरह लगती है और  स्त्री सौंदर्य को नया आयाम देती हैं. भिक बालियों को पुरुष धारण करते हैं.


Jewels of Tamil Nadu | by Swapnil Shukla

ज्वेलस ऑफ तमिल नाडु

 

भारतीय आभूषणों  का इतिहास कुछ 5000 वर्ष प्राचीन है. सौंदर्य के प्रति लोगों के आकर्षण ने आभूषणों की महत्ता को जन्म दिया . भारतीय आभूषणों की अद्वितीय व बेहतरीन डिज़ाइन्स की अपनी ही अदा है. भारतीय शास्त्रीय नृत्य जैसे भरतनाट्यम , कुचिपुड़ी , मोहिनीअट्टम आदि नृत्य शैलियों में  भी आभूषणों को बहुत महत्व दिया जाता है. राजा महाराजाओं के काल से ही भारतीय आभूषण न सिर्फ इंसानों के लिए बल्कि  विशेष पर्वों पर देवी देवताओं व पशुओं जैसे हाथी ,घोड़े आदि के लिए भी तैयार किए जाते हैं.

आभूषणों की भिन्नता किसी राज्य विशेष की भौगोलिक संरचना , लोग , सभ्यता, परंपरा  व  जीवन शैली आदि के आधार पर हो सकती है. उदाहरण के लिए तमिल नाडु व केरल के आभूषण शुद्ध सोने से तैयार किए जाते हैं जिनकी डिज़ाइन्स प्रकृति से प्ररित होती हैं . कुंदन व मीनाकारी से लैस आभूषण मुगल काल से प्रचलित हुए. राजस्थान ,गुजरात , मध्य प्रदेश व हिमाचल प्रदेश में चाँदी के बीड्स से लैस आभूषण अधिक प्रचलन में  हैं.

असम के आभूषणों की डिज़ाइन्स पुष्पों से प्रेरित होती हैं. मणिपुर के ज्वेलरी मेकर्स  सींप, पशुओं के पँजों,  दाँतों व कीमती  पत्थरों से आभूषणों का निर्माण करते हैं .भारतीय स्वर्ण , चाँदी व हीरे आदिके आभूषण कीचमक पूरे विश्व में फैली है.

यदि हम तमिल नाडु के आभूषणों की विशेषता की बात करें तो यहाँ के आभूषण अपने अतुल्नीय सौंदर्य के कारण दुनियाभर में प्रख्यात हैं. तमिल लोगों पर स्वर्णाभूषणों की चाहत देखते ही बनती है. प्राचीन तमिल साहित्य में  महिलाओं द्वारा धारण करने वाले सिर से पाँव तक के आभूषणों का जिक्र किया  गया है. तमिल नाडु की प्राचीन  मूर्तियों द्वारा भी हमें यहाँ के गहनों की  विशिष्ट्ता के बारे में जानकारी प्राप्त होती  है.

तमिल परंपराओं के अनुसार , यहाँ के लोग हिंदू देवी- देवताओं को स्वर्णाभूषणों से अलंकृत करते हैं और इनकी मूर्तियों को  मंदिर में स्थापित करने से पूर्व  दर्पण के समक्ष प्रस्तुत करते हैं. ये आभूषण विभिन्न प्रकार के रत्नों, उपरत्नों , हीरों आदि से लैस होते हैं.

तमिल लोग सिर व माथे के आभूषणों  में क्रीडम जो कि स्वर्ण के मुकुट को कहते हैं जो रत्नों  से जड़ा हुआ होता  हैऔर मुख्यत: देवी- देवताओं व राजाओं को पहनाया जाता है . माथे को अलंकृत करने हेतु सूर्य व चंद्र पिराई को धारण किया जाता है. पट्ट्म को वर वधु माथे पर धारण करते हैं. कुंजम महिलाओं द्वारा धारण किया जाता है.

कानों के आभूषणों की यदि बात करें  तो इसमें मुख्यत:  थोडू, कडुक्कन, ओलई , पंपडम, मात्तल , कुंडलम, जिमिक्की , कडिप्पु, पोड़ी आदि प्रचलित हैं.

गले के हार के अंतर्गत मालई या चरम , जिसे शुद्ध सोने, मोती एवं मूँगे द्वारा तैयार किया जाता है. कासू मालई , सोने की लंबी चेन को कहते हैं जो स्वर्ण के सिक्कों द्वारा बनाई जाती है.  माँगा मालई , एक प्रकार की लंबी चेन होती है जो आम के आकृति से प्रेरित होकर बनाई जाती है  जिसमें बेशकीमती पत्थर व रत्न जड़े होते हैं. कोड़ी मालई , पत्तियों की डिज़ाइन से प्रेरित चेन होती है जो स्वर्ण से तैयार की जाती है. गले के श्रृंगार के लिए संगिलि व चावड़ी भी तमिल महिलाओं के बीच अत्यधिक प्रचलित हैं.

हस्त आभूषणों के अंतर्गत कप्पू, नेली,  वंगी,  नागोथू ( नाग के आकार का बाजू बंध ), कंगनम , थोलवलई कप्पू ( साड़ी पर पकड़ के लिए कँधे पर धारण करने वाला एक आभूषण ), नागर या  नागम ( कोबरा के आकार का आभूषण ) आदि प्रचलित हैं.

कमर के आभूषणों में ओड़ीयनम , अरनाल, अरईजन्न कोड़ी, अरसला आदि सम्मिलित हैं.  पाँव  के आभूषणों के अंतर्गत  सिलंबू , सलंगई , मेटटी , कोलुसु , पदक्कम आदि शामिल हैं.  संगम सहित्य में तमिल के आभूषणों की विधिवत जानकारी प्रदान की गई है. निसंदेह  ये आभूषण  यहाँ के लोगों के लालित्य में चार चाँद लगाते हैं और धारणकर्ता  के व्यक्तित्व व सौंदर्य को एक नया आयाम प्रदान करते हैं.

–  स्वप्निल शुक्ला ( Swapnil Shukla )

ज्वेलरी डिज़ाइनर  ( Jewellery Designer )
फ़ैशन कंसलटेंट  ( Fashion Consultant )



 

Fashion Tips and Tricks | by Swapnil Shukla ~ Vol -04 , Year 2016 , Part – 2nd

SWAPNIL   SAUNDARYA  e-zine
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Fashion Tips and Tricks
Vol -04 , Year 2016 , Part – 2nd

 New Innovations and Trends in Fashion | by Swapnil Shukla

फ़ैशन के नव आविष्कार व ट्रेंड्स

अगर कोई आभूषण सौंदर्य में इज़ाफा करने के साथ आपके स्वास्थ  का भी ख्याल रखे तो ऐसे आभूषणों के प्रति आपका आकर्षित होना लाज़मी है. आभूषणों की दुनिया के सबसे नव आविष्कार के रुप में आज बाज़ार में बायो मैग्नेटिक आभूषण तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं. वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति में चुम्बकों का  प्रयोग सदियों से होता आ रहा  है.प्राचीन समय में युनानी लोग चुम्बक दिमाग में लगाकर सिरदर्द ठीक किया करते थे . इसके अलावा किसी अंग के  माँस या मसल्स की सूजन को कम करने के लिए भी उस पर चुम्बक रख कर इलाज किया जाता था. वर्तमान समय में भी कई जगहों पर इस पद्धति के प्रयोग द्वारा जोड़ों के दर्द, गठिया आदि का इलाज किया जा रहा है. इसके  लिए चुम्बकीय पेंडेंट ,चुम्बकीय ब्रेसलेट ,नेकलेस, फुटवियर आदि का उपयोग हो रहा है, जिसे बायो -मैग्नेटिक अर्थात चुम्बकीय ज्वेलरी कहते हैं. इसके माध्यम से अदृश्य चुम्बकीय रेखाएं परोक्ष रुप से हमारे शरीर पर पॉज़िटिव प्रभाव डालती हैं. चुम्बकीय गुणों से युक्त ये गहने अनिद्रा, कब्ज, सिरदर्द ,गठिया , पीठ दर्द जैसी समस्याओं में राहत देने के साथ साथ  आपके व्यक्तित्व में भी चार चाँद लगाते हैं.यह आभूषण कॉलेज गोइंग युवतियों  से लेकर कामकाजी महिलाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हैं.  बाज़ार में बिकने वाले अधिकतर आर्टिफीशियल आभूषणों में लेड और नुकसानदायक पेंट होते हैं,जो त्वचा में एलर्जी का कारण बनते हैं परंतु बायो- मैग्नेटिक आभूषणों में इस प्रकार के नुकसान की संभावनाएं नहीं होती हैं. वर्तमान समय में बायो मैग्नेटिक आभूषणों की इन विशेषताओं व बेहतरीन अभिकल्पों के कारण इनका क्रेज दिनों दिन बढ़्ता जा रहा है.

फ़ैशन जगत में आए दिन नए आविष्कार व एक से एक ट्रेंड्स से हमारा साक्षात्कार होता है . ऐसे में खुद को स्टाइलिश लुक देने के लिए नवीन फ़ैशन ट्रेंड्स की जानकारियों से स्वयं को अपडेट रखिये. अक्सर देखने में आता है कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष फ़ैशन के मामले में अधिक उलझे हुए से दिखाई देते हैं. पुरुष अपनी फैशन संबंधित उलझनों से छुट्कारा पाने हेतु अपनी वार्डरोब में कुछ खास परिधानों को शामिल कर सकते हैं.

वर्तमान समय में 90 के दशक का स्टाइल वापस आ गया है. हल्के से ऊँचे पैंट अर्थात प्लीट्स दुबारा ट्रेंड में आ गए हैं, इन्हें विंटेज स्टाइल नाम दिया गया है. अगर आप लेटेस्ट ट्रेंड को अपनाना चाहते हैं तो प्लीट्स को अपनी वार्डरोब में जरुर स्थान दें.
डेनिम का ट्रेंड भी कुछ  समय से वापस आ गया है. आप चाहें तो सफेद रंग की डेनिम जैकेट खरीदें जिसे आप अपने हर परिधान के साथ मैच कर सकते हैं. अगर आप डेनिम जींस खरीदने के बारे में विचार कर रहे हैं तो कुछ बातों का विशेष ख्याल रखें. स्टोर में उपलब्ध अलग अलग प्रकार की कट्स और ब्रांड के जींस  ट्राई करें . जींस में इस्तेमाल किए गए फैब्रिक और देश के बारे में पढ़ें. डेनिम में ऐसी जानकारी आसानी से मिल जाएंगी. वैसे यूएसए व जापान में निर्मित जींस आमतौर पर सुरक्षित माने जाते हैं. डीटेल्स पर ध्यान दें . डेनिम के वज़न को समझें. लाइट वेटेड डेनिम 340 ग्राम या उससे कम होता है , मिड वेट डेनिम 340 ग्राम से 411ग्राम का होता है और हेवी वेट डेनिम 411 ग्राम से ऊपर का होता है.

आप अपने वार्डरोब में फ्लोरल प्रिट के कपडों को भी शामिल कर सकते हैं. इसके अललावा रिप एंड रिपेयर का ट्रेंड आज भी बरकरार है. फैशन के नाम पर यह कहीं -कहीं से फेडेड और फटी हुई सी लगने वाली जींस काफी ग्लैमरस लुक देती है .

महिलाएं अपनी वार्डरोब में वर्टिकल स्ट्राइप्स प्रिंटेड परिधान , ऐसिमिट्रिक कुर्ते, हाई लो स्कर्ट्स ,सॉलिड कलर्स व वेजिस हील्स को शामिल करें.

ज़िंदगी के हर पल  का आनंद उठाएं. नवीन फ़ैशन ट्रेंड्स को अपनाएं और अपनी सुंदरता को चार चाँद लगाएं. कभी भी कोई भी सुंदर वस्तु देखने का या उसे अपनाने का अवसर मत गवाइये क्योंकि सुंदरता ईश्वर की लिखावट है. पर याद रखिए अक्सर लोग सुंदर होते हैं, दिखने में नहीं ,न ही इसमें कि वे क्या कहते हैं बल्कि इसमें जो कि वे हैं.


Bohemian Fashion and Jewels| by Swapnil Shukla

बोहेमियन फ़ैशन व ज्वेल्स

फ़ैशन जगत में आए दिन नए बदलाव देखने को मिलते हैं. फ़ैशन पंडित लोगों की जीवनशैली को आरामदायक व सौंदर्यपरक बनाने हेतु एक से बढ‌कर एक नव स्टाइल्स को बाज़ार में उतारते रहते हैं. जब बात स्टाइल की हो तब बोहेमियन शब्द की चर्चा करना अनिवार्य सा प्रतीत होता है. बोहेमियन स्टाइल है ही इतना खास ,सुगम व आपके सौंदर्य में चार चाँद लगाने वाला कि आपको यह स्टाइल अपनाते हुए कभी भी अफसोस न होगा.

बोहेमियन शब्द का इस्तेमाल एक अपारंपरिक , रुढ़ीवादी सोच से अलग, सजीव, उत्साही, जोशपूर्ण , स्वतंत्र व स्वछंद रवैये को दर्शाने हेतु किया जाता है. बोहेमियन स्टाइल जिसे बोहो स्टाइल भी कहा जाता है, के अंतर्गत नेचरल अर्थात आर्गेनिक मटैरियल्स जैसे लिनिन, कॉटन, लकड़ी, पत्थर , धागे आदि से बने कपड़े व गहनों का अधिक इस्तेमाल किया जाता है. बुनाई द्वारा तैयार की गई वस्तुएं  बोहेमियन  स्टाइल के अंतर्गत अधिक प्रचलित हैं.

लगभग 200 वर्षों से भी अधिक समय से बोहेमियन स्टाइल , एक बेहतरीन फ़ैशन विकल्प के रुप में प्रचलित है. पुराने समय में  बोहेमियन स्टाइल अधिकतर कलाकारों , चित्रकारों, लेखकों या इंटलेक्चुअल्स की पसंदीदा सूची में शामिल था. बोहेमियन स्टाइल के अंतर्गत ढीले, विभिन्न रंगों से लैस व सौंदर्यपरक आउटफिट्स शामिल हैं. हवा में लहराते बाल, लकड़ी , मोती, धागे, कपड़े , बीड्स आदि से तैयार ज्वेलरी भी  बोहेमियन  स्टाइल  का अभिन्न अंग है.

अपने व्यक्तित्व को बोहेमियन स्टाइल के अनुरुप ढालने हेतु आप पुरातात्विक अभिकल्प से लैस गहने धारण कर सकती हैं. साथ ही आप स्कर्ट , लूस बेल्ट, टी शर्ट हैट आदि धारण कर स्वयं को बोहेमियन परिवेश में ढाल सकती हैं. बोहेमियन स्टाइल की सबसे महत्वपूर्ण व रोचक बात यह है कि इस में आपको मैचिंग की फिक्र करने की आवश्यकता नहीं. अर्थी कलर्स व फैब्रिक्स धारण कर आप बोहेमियन फ़ैशन अपना सकती हैं.

बोहेमियन  स्टाइल के अंतर्गत बीड्स के मल्टी स्ट्रेंड्स, विभिन्न चूड़ियाँ व ब्रेसलेट, अपारंपरिक व हस्तनिर्मित गहने , डैंगल्स, लंबे हूप ईयररिंग्स आदि शामिल हैं. परिधानों में पैच वर्क , पेज़ली, फ्लोरल मोटिफ, काफतान, रफल्स, लेस आदि से लैस ड्रेसेज़ बोहेमियन स्टाइल को दर्शाते हैं.

बोहेमियन फ़ैशन के इतिहास पर यदि नज़र डालें तो हम पाएंगे कि प्राचीन समय में यह केवल चित्रकारों, कलाकारों, लेखकों आदि जैसे व्यवसाय से संबंधित लोगों के मध्य अधिक प्रचलित था पर वर्तमान समय में बाज़ारीकरण के दौर में अब इस फ़ैशन स्टाइल को हर कोई अपना कर अपने सौंदर्य में इज़ाफा कर सकता है.
यदि आप भी अपने व्यक्तित्व को बोहेमियन  स्टाइल के अनुरुप ढालने की इच्छुक हैं तो निम्नलिखित वार्डरोब  एसेंशियल्स को जरुर अपनाएं और  बोहेमियन  स्टाइल का लुत्फ उठाएं.

– सिंपल मैक्सी स्कर्ट : अपनी वार्डरोब में सिंपल मैक्सी स्कर्टको शामिल करें व इसे ग्राफिक टी-शर्ट व ग्लैडिएटर सैंड्ल्स के साथ धारण करें. आप वी- नेक टीशर्ट व हैट के साथ भी इसे धारण कर सकती हैं.

– न्यूट्रल रंग के एंकल बूट्स : इन्हें आप शॉर्ट स्कर्ट्स व स्किनी जींस के साथ धारण करें . जींस के साथ साथ लूज़ निटेड स्वेटर भी पहन अपने व्यक्तित्व में चार चाँद लगा सकती हैं.

– हेड रैप्स व हेयर बैण्ड्स भी बोहेमियन स्टाइल का महत्वपूर्ण अंग हैं. इनको धारण कर आप अपने व्यक्तित्व को स्टाइलिश लुक  प्रदान कर सकती हैं.

– प्रिंटेड मैक्सी ड्रेसेज़ : ज्यामितीय या प्रकृति से प्रेरित प्रिंटस से लैस मैक्सी ड्रेस आपके व्यक्तित्व को नया आयाम प्रदान कर सकती हैं.

– निटेड कार्डिगन्स व स्वेटर्स : बेल बॉट्म्स के साथ आप क्रोशिये से बने स्वेटर धारण कर अपने व्यक्तित्व को बोहेमियन स्टाइल के अनुरुप ढाल सकती हैं. यदि आप ट्यूनिक टी-शर्ट इमब्राइडरी से लैस टॉप्स को फ्लेयर्ड जींस , प्लेट्फार्म सैण्ड्ल्स के साथ धारण करती हैं तो यह निश्चित ही आपके सौंदर्य में इज़ाफा करेगा.

इसके अतिरिक्त  डेनिम वेस्ट्स को आप वीनेक टीशर्ट या मैक्सी स्कर्ट के साथ धारण कर सकती हैं . आप क्रोशिये के वेस्ट को फ्लोरल ड्रेसेज़ या फ्लेयर्ड जींस व टी- शर्ट के साथ मैच कर सकती हैं.  ओवरसाइज़्ड सनग्लासेज़ , चटख रंग की लिपस्टिक ,स्कार्फस व हिप्पी चिक पर्स के साथ आप अपने व्यक्तित्व को पूर्णतया बोहेमियन स्टाइल  में ढाल बन जाएंगी बोहो चिक.

Fashion for 40+ Women | by Swapnil Shukla

फ़ैशन फॉर 40+  विमेन 

आज के परिवेश में स्वयं की अलग पहचान बनाने के लिए अपने काम में पूर्ण दक्षता होने के साथ -साथ खुद को दूसरों के समक्ष सही तरीके से पेश करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है . आज के समय में अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए सही फ़ैशन व स्टाइल को अपनाना बहुत आवश्यक है . अक्सर  40 की उम्र पार  करने के बाद महिलाओं को फ़ैशन के मामले में काफी सोचना पड़्ता है. ऐसे में कई बार गलतियाँ होना भी स्वाभविक हो जाता है .उदाहरण के लिए सही राय के अभाव में ऐसे कपड़ों  का चयन करना जो उनकी उम्र के अनुकूल न हो .परिणामस्वरुप ऐसी गलतियाँ आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक व प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं. ऐसे में प्रश्न उठता है कि 40 की उम्र पार कर गईं महिलायें अपनी वार्डरोब में किस तरह के परिधानों को जगह दें जिससे वे स्टाइलिश लगने के साथ- साथ अपनी उम्र की गरिमा को भी बरकरार रख सकें. इस संदर्भ में आइये जानते है फ़ैशन टिप्स फॉर 40+  विमेन :-

– यदि आप ट्राउज़र ,शर्ट या जींस व टॉप पहन रही हैं तो थोड़ी ढीली फिटिंग वाली पहने.

– मिनी ड्रेस ,मिनी स्कर्ट बिना फिटिंग के ब्लेज़र ,लंबी स्कर्ट आदि पहनने से बचें.

– कपड़ों की फिटिंग न तो बहुत अधिक ढीली हो और न ही बहुत ज्यादा टाइट.

– अगर आपकी टांगें और शरीर के अन्य हिस्से फैटी हों तो शार्ट ड्रेस पहनने से बचें.

– आप शार्ट स्लीव ब्लाउज के साथ बॉर्डर वाली साड़ी और मैचिंग नेकलेस से अपने व्यक्तित्व में चार -चाँद लगा सकती हैं.

– लॉन्ग कोट से आप अपना स्टाइल स्टेट्मेंट बनाएं.

– 6 महीनों के अंतराल में अपने वॉर्डरोब को अपडेट रखें.

– हर मौसम का अपना एक अलग फ़ैशन व स्टाइल होता है .यह स्टाइल सिर्फ कपड़ों से ही नहीं , बल्कि मेकअप और एक्सेसरीज़ से भी मिलकर बनता है. जिस प्रकार किसी वस्तु को निखारने के लिए उसका  डेकोरेशन जरुरी होता है उसी प्रकार व्यक्तित्व को खूबसूरती प्रदान करने हेतु सही कपड़ों के साथ संतुलित आभूषणों व एक्सेसरीज़ की भी  आवश्यकता होती है.

– अगर आप अपना एक अलग स्टाइल स्टेट्मेंट बनाना चाहती हैं तो अपनी ड्रेस से मैच करते आभूषणों का भी  प्रयोग करें. सोने, चाँदी, हीरे ,प्लेटिनम आदि के अतिरिक्त अन्य कई प्रकार के आभूषण चलन में हैं जो बेहद कम दामों में आपके व्यक्तित्व को एक अलग व शानदार आयाम देंगे.

– आभूषणों के अलावा घड़ी और सनग्लास् जैसी एक्सेसरीज़ का भी उपयोग बेहतर है.

– अपनी भौंहे सदैव शेप में रखें. बेहतरीन आकार में सेट करी गईं आई ब्रोस आपके चेहरे को और अधिक प्रभावशाली बनायेंगी.

– लेस इज़ मोर के सिद्धांत पर अमल करें . ज्यादा भारी काम वाले परिधानों को दरकिनार करें.

– अपने पसंदीदा परिधानों की सही फिटिंग के लिए आप बॉडी शेपर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

– इस  बात पर गौर फरमाएं कि स्टाइल का मतलब किसी  भी फैशन ट्रेंड को आँख मूंदकर अपना लेना नहीं होता . फैशन वही अपनाना चाहिये जो आपकी उम्र व शरीर के मुताबिक उचित लगे और आप फर फबे.

Fashion for Men | by Swapnil Shukla

फ़ैशन फॉर मैन 





फ़ैशन जगत आज महिलाओं तक ही सीमित नहीं अपितु पुरुष भी आज अपने लुक्स और व्यक्तित्व को लेकर काफी जागरुक हो गए हैं. इसमें कुछ गलत भी नहीं. हर कोई खुद को ट्रेंडस व लेटेस्ट फ़ैशन के अनुरुप संवारना चाहता है . परंतु गलत राय व अनुचित संयोजन, आपके लुक को  फ़ैशन डिसास्टर की श्रेणी में ला सकते हैं. अत: निम्नलिखित बातों पर अमल कर आप खुद को एक बेहतरीन व स्टाइलिश अवतार में ढाल सकते हैं.

– किसी भी आउटफिट की सही फिटिंग की अपनी महत्ता है. इसलिए यह बेहद जरुरी है कि आपके आउटफिट की फिटिंग आपकी बॉडी की नाप के अनुरुप हो.

– आपकी वॉर्डरोब ऐसी हो जिसमें सम्मिलित हर आउटफिट सिंपल व एलिगेंट हो . लेकिन किसी भी वस्तु की अति करने से बचे. उदाहरण के लिए, अपने आउटफिट के साथ तीन एक्सेसरीज़ से अधिक एक्सेसरीज़ का प्रयोग न करें. या फिर ऐसे आउटफिट्स को दरकिनार करें जिनमें तीन से अधिक रंगों का संगम हो. फ्लैशी वस्त्रों से बचें. काली स्ट्राइप्स से लैस शर्ट के साथ श्वेत रंग का ब्लेज़र , डार्क कलर की जींस , बेल्ट व शूज़ के साथ एक रिस्ट वॉच या पेंडेंट विद चेन , आपके व्यक्तित्व में चार – चाँद लगाएंगे.

– डिटेलिंग पर पैनी निगह रखें . डिटेलिंग से तात्पर्य है आपके आउटफिट के साथ स्कार्फ , पॉकेट स्क्वेयर ( Pocket Square ) या आपकी टाई नॉट .

– यदि आप फ़ैशन टीस जिनमें किसी कंपनी के लोगो का अभिकल्प बना है, धारण करते हैं तो इस बात का ध्यान दे कि कहीं आप चलते -फिरते बिल बोर्ड तो नहीं  लग रहे . इसलिए कोकाकोला शर्टस को कहें अलविदा और क्लासिक वी नेक टी शर्टस या किसी आर्टिस्टिकली डिजाइंड टी- शर्ट को दें अपनी वॉर्डरोब में स्थान.

– लेटेस्ट ट्रेंडस की दौड़ में मत भागिये बल्कि ऐसे आउटफिट्स को अपनी वॉर्डरोब में शामिल करें जो आपकी पसंद के अनुरुप हों.

– किसी भी वस्तु की खरीददारी से पूर्व खुद से यह प्रश्न करें कि क्या इस वस्तु को आप इसके ब्रांड नेम के कारण खरीद रहे हैं या आपको उस वस्तु की क्वालिटी व स्टाइल वाकई भा गया है.  खुद से प्रश्न करें कि क्या इस वस्तु को आप तब खरीदते यदि इस पर किसी निश्चित ब्रांड का लोगो न होता .

– जो आपके बेहद करीबी और विश्वसनीय लोग हैं , उनसे इस बारे में फीड्बैक अवश्य लें कि उनके अनुसार आप पर कौन सी वस्तुएं व स्टाइल अधिक फबता है या किन जीज़ों से आपको बचना चाहिये.

– अपने स्टाइल के साथ नए एक्सपेरिमेंट्स करने से गुरेज़ न करें. यह आपके व्यक्तित्व में हर समय नयापन व फ्रेशनेस को कायम रखने में मददगार सबित होगा.

– फार्मल अटायर की यदि बात करें तो सदैव उन शर्टस का  चुनाव करें जिनमें मोनोक्रोमैटिक कलर स्कीम का इस्तेमाल किया गया हो. इससे आपकी अपर बॉडी अधिक हाईलाइट होती है और आपके संपूर्ण  व्यक्तित्व की शोभा बढ़्ती है.  श्वेत, बेश् , ब्राउन, ब्लू आदि रंग पुरुषों पर अधिक फबते हैं .शर्टस पर वर्टिकल स्ट्रिप्स, चेक व अन्य पैटर्न भी आपके व्यक्तित्व में इज़ाफ़ा करते हैं.

– फार्मल अटायर में पैंट्स , डार्क या लाइट शेड्स की हो सकती हैं परंतु इनका रंग ओवरकोट के साथ मेच करता हुआ हो.  मिस मैच से बचें.  ब्लैक, ब्राउन , ग्रे और बेश जैसे सदाबहार रंगों का चुनाव कर सकते हैं.

–  स्वप्निल शुक्ला ( Swapnil Shukla )

ज्वेलरी डिज़ाइनर  ( Jewellery Designer )
फ़ैशन कंसलटेंट  ( Fashion Consultant )

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Swapnil Saundarya Label’s #Inspired by nature !

 #Inspired by nature !
Unveiling one of a kind limited edition fine hand crafted jewellery inspired by nature and elements celebrating its beauty ……. Cheers !

About the Designer 

SWAPNIL  SHUKLA ~
A Jewellery Designer, Fashion Consultant, Artist, Fashion Columnist and Author. Attended SDPW, New Delhi.

Swapnil Shukla is an Indian Jewellery Designer, Couturier ,Columnist and Artist . She specializes in trends Forecasting, Lifestyle, Fashion, Gemology , Art and Astrology. After graduating from South Delhi Polytechnic for Women , New Delhi ( First with Distinction ) , she studied export management and start working as freelance designer and undertook jewellery design projects.
She also worked as Design Columnist for many Nationalized Magazines and started the  famous and highly traffic grabber fashion & Lifestyle blog ‘Swapnil Saundarya’ available in English as well as in Hindi  . Swapnil has also authored two books namely  ‘Gehne – The Art of wearing Jewellery’ and Fashion Pandit . She has launched her own Designer Jewellery brand namely ‘Swapnil Jewels & Arts’ and now with a desire to add new dimensions to the design and Art industry , she started ‘ Swapnil Saundarya Label ‘ with a motive to make everybody’s life beautiful and just like their Dream World .
In the words of Swapnil , “All my designer products  are very close to my heart because all of them are  intricate yet striking, bold yet feminine. They  truly represents the spirit of a woman ”
” My  greatest satisfaction is a happy client “, she added.
Nature, Art, Various Cultures, Religion  inspired Swapnil  in designing.Swapnil says, ” Jewellery is an expression of form, shape, function creatively with techniques old & new. With revere for the traditional techniques of jewellery making, my endeavour is to showcase a collection that is conformist to the technique & non-conformist in the way it is rendered.Parallel to it is the collection that follows the modern techniques of jewellery making with coloured gemstones, pearls…left best to the imagination!!!

Swapnil has worn several hats , Jewellery Designer, Fashion Consultant, Craft Expert, Writer and Painter. More recently she diversified into Handicraft Products as an experiment in her journey in design .

Every experiment in her life she avers has been … “a step in my journey of growth and self discovery, a kaleidoscopic part of life that enriches the fabric of my work and existence.”

copyright©2016 .Swapnil Saundarya Label .All rights reserved

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A Desi Tale of our first Indian Chemo Dolls !!

A Desi Tale of our  first Indian Chemo Dolls !!!!! Unlocked by one of the leading Nationalised Magazines .

We are unable to find appropriate words to properly express the immense feeling of gratitude and would love to say a sincere thanks to everyone involved in noticing our efforts and for giving the story of our Chemo Dolls, a place in your renowned magazine . Get the exciting details here, 

ब्यूटिफुल व बोल्ड  कीमो डॉल्स ( Beautiful and Bold :: Swapnil Saundarya Chemo Dolls ) 

कर्क रोग अर्थात कैंसर ( Cancer ) का नाम ही किसी व्यक्ति को भयभीत करने के लिए काफी है.मृत्यु का पर्याय बन चुके इस रोग को आरंभिक अवस्था में आसानी से ठीक किया जा सकता है . कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में ही निदान ( Diagnosis ) होना पीड़ित के उपचार के लिए बेहद आवश्यक  है और इसके लिए हमें इस रोग के विविध लक्षणों की पर्याप्त जानकारी होना अति आवश्यक है. कैंसर का इलाज एक जटिल प्रक्रिया है जो पीड़ित व्यक्ति को न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी झकझोर कर रख देता है. कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरपि ( ChemoTherapy ) एक आवश्यक प्रक्रिया है जिसके कई दुष्प्रभाव भी होते हैं. यदि आप किसी कैंसर पीड़ित की असल ज़िंदगी में झाँक कर देखें तो आप पाएंगे कि हमारे समाज में ऐसे कितने की तकलीफदेह उदाहरण  हैं जिनमें कैंसर के कारण कितनी ही महिलाओं को उनके परिवार वालों ने धैर्य व मानवता की कमी के चलते तिल -तिल कर मरने के लिए छोड़ दिया. कितने ही कैंसर पीड़ित सही राय व इलाज के अभाव में व कितनों को ही आर्थिक तंगी के चलते अपनी ज़िंदगी से हाथ धोना पड़ा. ये अनुभव विचलित करते हैं. इनके अतिरिक्त कई ऐसे भी उदाहरण  हैं जहाँ कैंसर पीड़ितों ने अतुल्नीय साहस व दृढ़्ता का परिचय  देते हुए कैंसर जैसे रोग का सामना किया व कैंसर से अपनी लड़ाई को पूर्ण आत्मशक्ति से जीता.कई महिलाओं से बातचीत द्वारा ये बात सामने आई की कीमोथेरेपि के कई दुष्प्रभावों में से एक, बालों का पूर्णतया झड़ जाना , महिलाओं को सबसे अधिक झकझोर कर रख देता है. अचानक उनके सौंदर्य में इज़ाफा करने वाले उनके शारीरिक अलंकारों को स्वयं से अलग होते देख वे विचलित हो उठती हैं. ऐसे में शारीरिक व मानसिक तकलीफ से कहीं ज्यादा वे भावनात्मक स्तर पर टूटती जाती हैं.यह एक बेहद दर्दनाक अनुभव है. ऐसे में हम व हमारे समाज का यह कर्त्तव्य बनता है कि हम ऐसे कठिन समय में इनकी शारीरिक,मानसिक तकलीफ को समझने के साथ इनकी भावनात्मक तकलीफ पर भी गौर फरमायें व इनका हौसला बढ़ाएं . कैंसर जैसे जटिल रोग से लड़ने वाले उन साहसी लोगों के जज़्बे को सलाम देते हुए व उनसे प्रेरित होते हुए डिज़ाइनर लाइफस्टाइल उत्पादों की निर्माता फर्म स्वप्निल सौंदर्य लेबल (#SwapnilSaundaryaLabel ) ने अभी हाल ही में कीमो डॉल्स (#DesiChemoDolls) का निर्माण किया. परंपरागत डॉल्स से अलग कीमो डॉल्स में आपको हर उस सशक्त कैंसर पीड़ित की छवि व झलक दिखेगी जिन्होंने कैंसर जैसी भयानक बिमारी का सामना पूर्ण साहस के साथ किया .

इस पर कंपनी के ओनर ऋषभ शुक्ला (Owner Rishabh Shukla ) ने कीमो डॉल्स के बारे में बताते हुए कहा,  “ज़िंदगी व मौत ईश्वर के हाथ  में है पर कैंसर जैसी बिमारी से लड़ने के इनके जज़्बे को सलाम देती स्वप्निल सौंदर्य कीमो डॉल्स निश्चित रुप से सभी के होठों पे मुस्कान बिखेरने की क्षमता रखती हैं. धागे से बनाई गईं ये डॉल्स बाल रहित हैं व इनके भाव दृढ़ हैं.एक मरीज़ की वेशभूषा धारण करें ये डॉल्स  कैंसर पीड़ितों की मजबूत मन:  स्थिति व कैंसर से लड़ने के साहस की परिचायक है.”

 कँपनी की चीफ डिज़ाइनर व सह-ओनर  स्वप्निल शुक्ला ( Chief Designer and co-owner Swapnil Shukla ) ने कीमो डॉल्स के निर्माण के पीछे की फिलॉस्फी के बारे में जानकारी देते हुए कहा ,  “इंसान की किस्मत उसकी तकदीर उसके अपने हाथों में होती है. कीमो डॉल्स के हाथ से जुड़ी है एक खूबसूरत रंग बिरंगी हैट जो उनके आत्मविश्वास को दर्शाती है. आत्मविश्वास ही उनके सिर का ताज है. यह आत्मविश्वास ही है जो उन्हें खूबसूरती प्रदान करता है जो  विषम परिस्थितियों में झंझाओं के बीच खड़े रहने का हौसला देता है. हाथ की हथेली से जुड़ी ये रंग बिरंगी हैट को आप कीमो डॉल्स के सिर पर  सुसज्जित कर सकते हैं. यह प्रक्रिया कीमो डॉल्स के संदेश को पूर्ण करता है कि आत्मविश्वास के बल पर आप कैंसर ही नहीं ज़िंदगी की बड़ी से बड़ी जंग लड़ सकते हैं और उसे जीत भी सकते हैं. बस आप में लड़्ने का जज़्बा व हिम्मत खत्म नहीं होनी चाहिये .निरंतर लड़्ते रहने व संघर्ष करते रहने का यह साहस आपको अग्निशिखा की भाँति सदैव प्रकाशित करता रहेगा.”

” कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं , हारा है वही जो लड़ा नहीं ”

स्वप्निल सौंदर्य कीमो डॉल्स ( Swapnil Saundarya Chemo Dolls ) उन तमाम कैंसर पीड़ितों को सलाम करती हैं जो पूर्ण साहस व आत्मशक्ति के साथ कैंसर ( Cancer ) जैसे जटिल रोग से लड़ते हैं, संघर्ष करते हैं व उस पर जीत हासिल करते हैं.

– उत्तर प्रदेश ब्यूरो

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SWAPNIL SAUNDARYA LABEL
Make your Life just like your Dream World !

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Jewels of Ladakh by Swapnil Shukla

Traditional Ladakh Jewellery ♤ Ethnic Jewellery of Ladakh
This appeared in one of the leading nationalised Magazines ☆☆☆☆☆☆

#SwapnilSaundarya #SwapnilJewels #DesignerSwapnilShukla  #thesparklingluxury #Ladakh

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